होम लोन की ब्याज दरों को लेकर ग्राहकों के साथ किए जा रहे मनमानी पर अविलंब सुनवाई हो


होम लोन की ब्याज दरों को लेकर ग्राहकों के साथ किए जा रहे मनमानी पर अविलंब सुनवाई हो
The Issue
होम लोन की ब्याज दरों में साल 2022-23 में ही इतनी ज्यादा बढोतरी कर दी गई है कि अब लोन चुकाते चुकाते ही मानो सारी जिंदगी इसी में कट जाएगी। 6.25 का लोन 9 महीने में 8.95 फीसदी हो गया है। हमने 20 साल के लिए लोन लिया और अब बढ़ी हुई ब्याज दरों के चलते यही लोन 27 साल के लिए हो गया। आरबीआई की मनमानी पर अविलंब सुनवाई होनी चाहिए। सालाना 8 से 10 लाख की आमदनी वाले लोग अपनी कुल आमदनी का लगभग 40 फीसदी होमलोन की किश्तें चुकाने में खर्च कर देते हैं और उसके बाद बच्चे की पढ़ाई लिखाई, घर के खर्चे, राशन पानी, दवाई और अन्य खर्चे मिलाकर उनके पास बचता ही क्या है। भारत के प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, आरबीआई को मध्यमवर्गीय परिवार के हितों के बारे में भी विचार करना चाहिए। मुफ्त राशन, मुफ्त आवास, मुफ्त सिलेंडर, मुफ्त पानी, मुफ्त बिजली की रेवड़ी बांटने वाली सरकारें क्यों नहीं मध्यमवर्गीय परिवारों की समस्याओं के बारे में विचार करती है। होम लोन की एक फिक्स रेट क्यों मुमकिन नहीं हो सकती है?
- RBI के द्वारा लगातार बढ़ाए जा रहे Repo Rate से होम लोन की ब्याज दरें प्रभावित ना हों, होम लोन की ब्याज दरें भी फिक्स होनी चाहिए। लगातार रेपो रेट बढ़ाए जाने से होम लोन के ग्राहकों पर अच्छी खासी महंगाई की मार पड़ रही है क्योंकि EMI सिर्फ एक दो महीने की बात नहीं यहां 10-20 साल किश्ते चुकानी पड़ रही है।
- मेरे हिसाब से टैक्स के नियम में भी बदलाव होने चाहिए और टैक्स छूट के दायरे को बढ़ाया जाना चाहिए। इनकम टैक्स एक्ट में 80सी के तहत होम लोन के प्रिन्सिपल अमाउंट पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को 1.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर देना चाहिए, क्यूँकि 80सी में पीपीएफ, ईपीएफ, यूलिप में निवेश भी शामिल है। होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट का दायरा भी बढ़ना चाहिए।
मैं अर्थशाष्त्र का जानकार नहीं हूं लेकिन अपने घर और परिवार की अर्थव्यवस्था के बारे में मुझे ही सोचना है। होम लोन घर का सपना साकार करने के लिए होता है लेकिन अगर ये होम लोन मध्यवर्गीय परिवार के अरमानों का गला घोंटने जैसा बनकर रह गया है। अगर आप सहमत है तो इस याचिका पर अपना समर्थन करें और माननीय प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और आरबीआई जैसी संस्थाओं तक आपकी और हमारी आवाज को पहुंचाने में मेरी मदद करें।

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The Issue
होम लोन की ब्याज दरों में साल 2022-23 में ही इतनी ज्यादा बढोतरी कर दी गई है कि अब लोन चुकाते चुकाते ही मानो सारी जिंदगी इसी में कट जाएगी। 6.25 का लोन 9 महीने में 8.95 फीसदी हो गया है। हमने 20 साल के लिए लोन लिया और अब बढ़ी हुई ब्याज दरों के चलते यही लोन 27 साल के लिए हो गया। आरबीआई की मनमानी पर अविलंब सुनवाई होनी चाहिए। सालाना 8 से 10 लाख की आमदनी वाले लोग अपनी कुल आमदनी का लगभग 40 फीसदी होमलोन की किश्तें चुकाने में खर्च कर देते हैं और उसके बाद बच्चे की पढ़ाई लिखाई, घर के खर्चे, राशन पानी, दवाई और अन्य खर्चे मिलाकर उनके पास बचता ही क्या है। भारत के प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री, आरबीआई को मध्यमवर्गीय परिवार के हितों के बारे में भी विचार करना चाहिए। मुफ्त राशन, मुफ्त आवास, मुफ्त सिलेंडर, मुफ्त पानी, मुफ्त बिजली की रेवड़ी बांटने वाली सरकारें क्यों नहीं मध्यमवर्गीय परिवारों की समस्याओं के बारे में विचार करती है। होम लोन की एक फिक्स रेट क्यों मुमकिन नहीं हो सकती है?
- RBI के द्वारा लगातार बढ़ाए जा रहे Repo Rate से होम लोन की ब्याज दरें प्रभावित ना हों, होम लोन की ब्याज दरें भी फिक्स होनी चाहिए। लगातार रेपो रेट बढ़ाए जाने से होम लोन के ग्राहकों पर अच्छी खासी महंगाई की मार पड़ रही है क्योंकि EMI सिर्फ एक दो महीने की बात नहीं यहां 10-20 साल किश्ते चुकानी पड़ रही है।
- मेरे हिसाब से टैक्स के नियम में भी बदलाव होने चाहिए और टैक्स छूट के दायरे को बढ़ाया जाना चाहिए। इनकम टैक्स एक्ट में 80सी के तहत होम लोन के प्रिन्सिपल अमाउंट पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को 1.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर देना चाहिए, क्यूँकि 80सी में पीपीएफ, ईपीएफ, यूलिप में निवेश भी शामिल है। होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली टैक्स छूट का दायरा भी बढ़ना चाहिए।
मैं अर्थशाष्त्र का जानकार नहीं हूं लेकिन अपने घर और परिवार की अर्थव्यवस्था के बारे में मुझे ही सोचना है। होम लोन घर का सपना साकार करने के लिए होता है लेकिन अगर ये होम लोन मध्यवर्गीय परिवार के अरमानों का गला घोंटने जैसा बनकर रह गया है। अगर आप सहमत है तो इस याचिका पर अपना समर्थन करें और माननीय प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और आरबीआई जैसी संस्थाओं तक आपकी और हमारी आवाज को पहुंचाने में मेरी मदद करें।

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The Decision Makers
Petition created on 6 January 2023