प्रत्युषा बैनर्जी के लिए न्याय की तलाश


प्रत्युषा बैनर्जी के लिए न्याय की तलाश
समस्या
प्रत्युषा, जिसे दुनिया "बालिका वधु" की "आनंदी" के नाम से जानती है, मेरी एकमात्र बेटी थी। यह बहुत दुखद है कि अब "आनंदी" हमारे बीच नहीं है। उससे भी दुखद यह है कि कुछ पुलिसवालों नेअपनी गर्दन बचाने के लिए इस बहुचर्चित मृत्यु को आत्महत्या का नाम दे दिया, जबकि हमारे पास इस बात के कई कारण मौजूद हैं कि उसकी हत्या की गई है ।
मैं आप सब की "आनंदी" और मेरी एकमात्र बेटी "प्रत्युषा" के लिए सिर्फ न्याय चाहती हूँ , और आप सबसे प्रार्थना करती हूँ कि प्रत्युषा को न्याय दिलाने में आप सब मेरा सहयोग करें। मैंविनम्रतापूर्वक आपसे निवेदन करती हूँ कि आप सब इस याचिका पर अपने हस्ताक्षर करके प्रत्युषा को न्याय दिलाने में मेरा साथ दें, जिससे माननीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी इस मामले की सघनजाँच के लिए सीबीआई को दिशा निर्देश दें कि वह इस मामले की गंभीरता पूर्वक जांच करे और हत्या की गुत्थी सुलझा सकने वाले हर पहलू पर गौर करे, जो कि स्थानीय पुलिस द्वारा या तोनज़रअंदाज़ कर दिए गए या उन्हें महत्व नहीं दिया गया जो कि सच्चाई को जानने के लिए गंभीर रूप से आवश्यक है ।
प्रत्युषा की मौत को आत्महत्या का नाम देने वाली स्थानीय पुलिस ने कई महत्त्वपूर्ण पहलुओं को दरकिनार कर दिया जिसमे कि मुख्य आरोपी और मेरी बेटी के बीच हुई आखिरी बातचीत की रिकॉर्डिंग,कई चश्मदीद गवाहों और उन लड़कियों के बयान भी थे जो कि मुख्य आरोपी से सम्बंधित थीं। यहाँ तक की शुरूआती जांच के दौरान स्वयं मुख्य आरोपी के पिछले वकील द्वारा उसके चरित्र और व्यवहारपर दिए गए अभिकथन को भी महत्व नहीं दिया गया । हमारा मानना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण सबूतों पर पुलिस द्वारा ध्यान न देना बेहद संदेहजनक है ।
और भी बातें जैसे, घटनास्थल पर मिले महत्वपूर्ण सबूतों को ना तो सील किया गया ना ही आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा गया और विशेष रूप से स्थानीय पुलिस द्वारा इसे जल्दबाजी मेंआत्महत्या बताने का सन्दर्भ- इस मामले की सघन जांच की आवश्यकता की व्याख्या करता है। यदि मेरी बेटी की लंबाई और छत से उसकी दूरी पर विचार करें तो हाथ तानने पर भी उसका वहां पहुंचनाअसंभव था। यह इस तर्क को ख़ारिज करता है कि उसने बिना किसी स्टूल या सीढ़ी की मदद या किसी और व्यक्ति की मौजूदगी के बिना खुद को पंखे से लटका लिया ।
अपराधस्थल की गंभीरता पूर्वक जांच के बगैर, जल्दबाज़ी में, विसंगत तरीके से इस दुर्घटना को संदेहात्मक रूप में आत्महत्या मान लिया गया जो कि पूर्ण रूप से अनुचित है। हमें कई तरह से डरायाऔर धमकाया गया परंतु न्याय के लिए हम अब भी उतने ही अडिग हैं क्योंकि सत्य का जाना जाना नितांत आवश्यक है।
हम इस हत्या की जांच में पूर्ण पारदर्शिता और न्याय की मांग करते हैं, सिर्फ प्रत्युषा के लिए नहीं, वो बेटी जिसे हम अब कभी देख नहीं पाएंगे, बल्कि हर एक आम इंसान के लिए- चाहे वो महिलाहो या पुरुष, चाहे वो बच्चा हो या वयस्क- और हर उस व्यक्ति के लिए जिसके खिलाफ अन्याय हुआ है ।
अतः इस मामले की सीबीआई जांच कराया जाना जरुरी है, और हमें विश्वास है कि, सीबीआई जांच के पश्चात ना सिर्फ न्याय मिलेगा और आरोपी को उसकी सजा मिलेगी बल्कि संपूर्ण राष्ट्र में एकप्रबल सन्देश जाएगा कि अभियुक्त कितना ही मजबूत क्यों ना हो, कानून सबके लिए एक ही है, और न्याय सबको मिलेगा, परिस्थितियां कैसी भी हों।
मैं अपने सभी हिंदुस्तानी साथियों के समक्ष हाथ जोड़कर विनम्र रूप से आपके सहयोग की प्रार्थना करती हूँ कि आप सब इस याचिका पर डिजिटल हस्ताक्षर करके माननीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंहजी से इस मामले की सीबीआई जांच का निवेदन करें, और जितना संभव हो लोगों तक ये बात पहुचाएं ।
मुझे भरोसा है कि हम सब न्याय पा सकते हैं और इस समाज को एक प्रबल सन्देश दे सकते हैं।
सोमा बैनर्जी
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http://Change.Org/justiceforpratyusha
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प्रत्युषा, जिसे दुनिया "बालिका वधु" की "आनंदी" के नाम से जानती है, मेरी एकमात्र बेटी थी। यह बहुत दुखद है कि अब "आनंदी" हमारे बीच नहीं है। उससे भी दुखद यह है कि कुछ पुलिसवालों नेअपनी गर्दन बचाने के लिए इस बहुचर्चित मृत्यु को आत्महत्या का नाम दे दिया, जबकि हमारे पास इस बात के कई कारण मौजूद हैं कि उसकी हत्या की गई है ।
मैं आप सब की "आनंदी" और मेरी एकमात्र बेटी "प्रत्युषा" के लिए सिर्फ न्याय चाहती हूँ , और आप सबसे प्रार्थना करती हूँ कि प्रत्युषा को न्याय दिलाने में आप सब मेरा सहयोग करें। मैंविनम्रतापूर्वक आपसे निवेदन करती हूँ कि आप सब इस याचिका पर अपने हस्ताक्षर करके प्रत्युषा को न्याय दिलाने में मेरा साथ दें, जिससे माननीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह जी इस मामले की सघनजाँच के लिए सीबीआई को दिशा निर्देश दें कि वह इस मामले की गंभीरता पूर्वक जांच करे और हत्या की गुत्थी सुलझा सकने वाले हर पहलू पर गौर करे, जो कि स्थानीय पुलिस द्वारा या तोनज़रअंदाज़ कर दिए गए या उन्हें महत्व नहीं दिया गया जो कि सच्चाई को जानने के लिए गंभीर रूप से आवश्यक है ।
प्रत्युषा की मौत को आत्महत्या का नाम देने वाली स्थानीय पुलिस ने कई महत्त्वपूर्ण पहलुओं को दरकिनार कर दिया जिसमे कि मुख्य आरोपी और मेरी बेटी के बीच हुई आखिरी बातचीत की रिकॉर्डिंग,कई चश्मदीद गवाहों और उन लड़कियों के बयान भी थे जो कि मुख्य आरोपी से सम्बंधित थीं। यहाँ तक की शुरूआती जांच के दौरान स्वयं मुख्य आरोपी के पिछले वकील द्वारा उसके चरित्र और व्यवहारपर दिए गए अभिकथन को भी महत्व नहीं दिया गया । हमारा मानना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण सबूतों पर पुलिस द्वारा ध्यान न देना बेहद संदेहजनक है ।
और भी बातें जैसे, घटनास्थल पर मिले महत्वपूर्ण सबूतों को ना तो सील किया गया ना ही आगे की जांच के लिए सुरक्षित रखा गया और विशेष रूप से स्थानीय पुलिस द्वारा इसे जल्दबाजी मेंआत्महत्या बताने का सन्दर्भ- इस मामले की सघन जांच की आवश्यकता की व्याख्या करता है। यदि मेरी बेटी की लंबाई और छत से उसकी दूरी पर विचार करें तो हाथ तानने पर भी उसका वहां पहुंचनाअसंभव था। यह इस तर्क को ख़ारिज करता है कि उसने बिना किसी स्टूल या सीढ़ी की मदद या किसी और व्यक्ति की मौजूदगी के बिना खुद को पंखे से लटका लिया ।
अपराधस्थल की गंभीरता पूर्वक जांच के बगैर, जल्दबाज़ी में, विसंगत तरीके से इस दुर्घटना को संदेहात्मक रूप में आत्महत्या मान लिया गया जो कि पूर्ण रूप से अनुचित है। हमें कई तरह से डरायाऔर धमकाया गया परंतु न्याय के लिए हम अब भी उतने ही अडिग हैं क्योंकि सत्य का जाना जाना नितांत आवश्यक है।
हम इस हत्या की जांच में पूर्ण पारदर्शिता और न्याय की मांग करते हैं, सिर्फ प्रत्युषा के लिए नहीं, वो बेटी जिसे हम अब कभी देख नहीं पाएंगे, बल्कि हर एक आम इंसान के लिए- चाहे वो महिलाहो या पुरुष, चाहे वो बच्चा हो या वयस्क- और हर उस व्यक्ति के लिए जिसके खिलाफ अन्याय हुआ है ।
अतः इस मामले की सीबीआई जांच कराया जाना जरुरी है, और हमें विश्वास है कि, सीबीआई जांच के पश्चात ना सिर्फ न्याय मिलेगा और आरोपी को उसकी सजा मिलेगी बल्कि संपूर्ण राष्ट्र में एकप्रबल सन्देश जाएगा कि अभियुक्त कितना ही मजबूत क्यों ना हो, कानून सबके लिए एक ही है, और न्याय सबको मिलेगा, परिस्थितियां कैसी भी हों।
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